Sunday, 13 November 2022

मुकम्मल ईश्क

मुक़्क़मल इश्क़ !<3

चलो एक पूरी सी कहानी लिखते है दो अधूरे किरदार मिल कर ! 
तुम्हें बस आना है मेरी ज़िंदगी में बस एक गुलाब लेकर और ज़माने से छुपते-छुपाते ,किसी किताब में रखकर एक अधूरी चिठ्ठी के साथ जिस पर, कुछ बेमतलब की शायरी लिखीं हो जिसका मेरे वज़ूद से कोई लेना देना ना हो,लेकिन फिर भी मैं पढ़ कर मुस्कुरा दूँ और शरमा कर सोचूँ की तुमने मेरे लिए हीं लिखीं है ! हाँ वो और बात है की मुझे पता होगा की तुम शायरी नहीं लिखते!
फिर उस गुलाब को चुम कर मैं अपनी किसी ख़ास डायरी में छुपा लुंगी जहाँ घर वालों की सालो-साल नज़र ना पड़े. 
फिर मन ही मन मैं तुम्हें बहुत चाहने लगु और दीवानगी का आलम इस कदर हो की हर मंगल वार मंदिर जाऊ और बाल-ब्रह्मचारि हनुमान जी से तुम्हें मांगू उन्हें बूंदी के लडडू चढ़ा कर ,और सारे सोमवारी करुँ की तुम ही मेरे जीवन साथी बनो पर तुमसे कुछ ना बोलूं.
तुम रोज़-रोज़ यूँ हीं मेरी गली के चक्कर लगाना और कभी-कभी चोरी से मुझे खिड़की से झांकते पकड़ लेना .ऐसे ही मुझे मेरी दुआं कबूल सी लगने लगे और तुम्हें भी तुम्हारे बिना पूछें हुए सवाल का जवाब हाँ में मिल जाये !
बस रूहानी इश्क़ हो ,दोनों में हो गज़ब का ,इशारों के रिश्ते हों , मुस्कुराहटों से ज़ाहिर हों .
ऐसा अधूरा सा प्रेम हों की एक दिन हम किसी अजनबी शहर चले जाये और तुम भी गली के चक्कर लगा कर थक जाओ तो कोई पड़ोस वाली नफीसा तुम्हें कह दें की वो मकान खाली कर के शहर छोड़ कर चली गयी उसे तुम्हारे दीवानेपन पे तरस आ जाये .बहुत होगा तो तुम उसे कह देना की मैं लौटूं तो तुम्हें बता दें और अपना नंबर छोड़ आना उसके पास कभी ना आने वाले कॉल के लिए और कहीं खो जाना दुनिया की भीड़ में ,और बेगाने शहर में हम भी कुछ दिन तुम्हारी याद में तड़पे और फिर नयी दुनियाँ बना लें अपनी .
इश्क़ भी मुकम्मल होगा , हाँ किरदार अधूरे होंगे पर कहानी पूरी होगी!

प्रज्ञा ठाकुर

LIFE- has deeper meanings

Life is not 'breathing 'Life has deeper meaningTo feel pain & pleasure & Do not react to both is a way to life.Observing the crawling ant with fascination & feel that smoothness of walk in your own imagination .How ease to live life, How deep life is .How invisible yet visible .  ©Pragyathakur

दीवाने बाबू की नीलू

दीवाने बाबू की दीवानी नीलू 
हर रोज़ की तरह आज भी सामान्य दिन था , बस एक फर्क था मेरा आज एग्जाम था कॉलेज में , रोज़ की तरह अपने पड़ोसी मेहता अंकल का लड़का मुझे बाइक से ड्राप कर देता था , कॉलेज में वो मेरा सीनियर था , हाँ २ साल से साथ जा रहे है ,सो थोड़ी सी दोस्ती आगे बढ़ी है , कभी-कभी इशारो में एक दूसरे से गुफ्तगू हो जाती है , या कभी एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है , रास्ते में बाइक पर तो कॉलेज सम्बन्धी दुनिया भर की बातें होती है , ,खूब ठहाके लगते है कभी- कभी किसी उटपटांग सी दूसरों की बातों पर .
चुप -चाप कॉलेज परिसर में दाखिल होते ही, दो अजनबियों की तरह अपने- अपने क्लास में चले जाते है ,ताकि लोग तरह-तरह की बातें न फैलाये , और हमारी जिंदगी में ताका झांकी न करें, बस इतना ही गहरा और समझदार रिश्ता है हम दोनों का , कभी- कभी लौटते वक़्त रास्ते में रुक के मंदिर चले जाते है या आइस-क्रीम खा लेते है , आइस-क्रीम वाला काका , हमे अफसर बिटिया ,और इनको दीवाने अफसर बाबू कहते है ,
क्यों ? क्यूंकि हम जो भी बातें करते है वह खड़े होकर चुप -चाप सुनता है , इसने कुछ दिन पहले की हमारी बातें सुन ली थी - अलोक(दीवाने बाबू )- मैं सोच रहा हूँ IAS के लिए prepare करू फाइनल ईयर है , तुम भी कहीं अच्छा सा कोचिंग देख लो , अभी से तैयारी करोगी तो आसानी से हो जायेगा पहले ही एटेम्पट में , 
नीलू- हाँ मैं भी यही सोच रही थी , मेरे पापा का सपना है ! फिर शायद पापा हमारी शादी के लिए भी मान जाये ,जब बेटी दामाद दोनों लाल बत्ती की गाड़ी से उतरेंगे ...
अलोक -हाँ तब तो हमारे मोहल्ले वालो की भी जुबान बंद होगी ,
आइस-क्रीम वाला बोल पड़ा , मुस्कुराते हुए - बिटीया भगवान आप दोनों को सफलताएं दें, तब आप दोनों इस गरीब काका को मत भूल जाना !
अलोक - अरे काका यार !आप कैसी बात कर रहे , तब तो हम आपके दुकान पर खड़े होकर आइस-क्रीम जरूर खाएंगे ! बस इतनी सी बात हुई थी और तबसे मैं अफसर बिटीया हूँ , और अलोक दीवाने अफसर बाबू ,मेरे कारन !!
अलोक -सुनो आज पेपर जल्दी ख़त्म होगा तो २ बजे मूवी देखने चलोगी ? ना नहीं सुनेंगे देख लो फिर हम बहुत बिजी होने वाले , फिर ना ले जा पाएंगे !
नीलू - अच्छा बाबा ठीक है , कौन सी लगी है ?
अलोक- the dark knight rises ...
मूवी देखि और बाहर निकल कर आइस-क्रीम वाले के पास गए !
अलोक- काका दो आइस-क्रीम , मैडम के लिए बटरस्कॉच और मेरे लिए तो काका अपनी मटका कुल्फी !
नीलू- ओह नो ! चलो यहाँ से मेरे पड़ोस वाले श्याम अंकल ने देख लिया , हमे निकलना चाहिए 
अलोक-अरे हद बात करती हो.देख लिया तो कौन सा कोई गलत काम कर रहे आइस-क्रीम ही तो खा रहे ! इन् पड़ोसियों की भी , हमसे मिलवा देना कोई बात हो तो , और टेंशन मत लो इतना ,इनके लड़के को देखे थे , गांजा फूकते हुई अपने DC के आगे ! 
नीलू- प्लीज घर चलो , ना जाने क्या बोल दे वो घर पे 
घर आयी घबराई सी मैं , पापा ने बस इतना कहा आज से तुम्हारा कॉलेज जाना बंद , लड़का देख रहे तुम्हारी शादी करनी है , 
बस फिर क्या था ? मेरे सपने टूटने ही वाले थे , दीवाने बाबू और मेरी दोस्ती ,रिश्तेदारी में बदलने के ही नहीं बल्कि IAS बनकर पापा के सामने आने के भी सपने , कई सारे सपने 
३ साल बाद ,
हम दोनों आज फिर से साथ बैठे है एक साथ , आइस-क्रीम वाले भैया के पास , एक दूसरे के हाथो में हाथ लिए , बस एक ही फर्क है . आइस-क्रीम खाने को नहीं मिलेंगे , तुम कुछ कहते नहीं आजकल ,चुप ही रहते हो , खाते भी नहीं , किसी से बात नहीं करते बस यहाँ आकर घंटो बैठे रहते हो मेरी यादों में , उन्ही लम्हो में कैद होकर आखिरी लम्हा मेरे साथ बिताया हुआ , जिंदगी तुम्हारी डार्क neight सी हो गयी है !
मुझे मालूम था की फिर ये लम्हा नसीब ना होगा ! 
अंकल ने माँ को कहा था , आपकी बेटी बदचलन है पड़ोसी के साथ सिनेमा हॉल के बाहर रोमांस फरमा रही, मुझे बहुत अफ़सोस है भाईसाब, आपने कैसे संस्कार दिए , माँ -पापा के खून में उबाल था , मुझे सजा मिली उम्र कैद (शादी की) और मैंने सबसे दूर अपनी बेहतरी के लिए जाना समझा , बस ज़रा सा जहर था जिसने मुझे तुमसे दूर करके पास कर दिया , जानती हूँ तुम तब से खामोश हो दुनिया के लिए ,लेकिन मुझसे तो रोज़ बातें होती है तुम्हारी .... 
फिर मिलेंगे नयी दुनिया में , इंतज़ार करना ,' मोहब्बत कभी अधूरी नहीं होती' बस नज़र का फ़र्क है  
तुम्हारी दीवानी नीलू  

प्रज्ञा ठाकुर. #hindi #yqbaba #yqdada #yqdidi #tales #love #stories #writer

Wednesday, 19 October 2022

स्त्रियां

कुछ स्त्रियां बंजर होती जाती है
खेतों की भांति
जिन्हें नहीं मिलती 'खाद'
वो जो समझे की,
क्यों ख़त्म हो रहीं इसकी क्षमताएं
क्या हैं नहीं जो समय के साँचो में
इनके पास से छीन लिया गया
सबसे अधिक प्रेम करने वाली
क्यूँ एकांतवास में उदासियाँ सी
रहने लगी
क्यूँ समंदर हो गई खारे पानी का
जो किसी झड़ने सी आयीं थी
क्यूँ मुरझा गईं वक़्त से पहले कितनी
जिसपर भँवरों का बैठना लगा हीं रहता था
क्यूँ बन गयी दासी अपने हीं
बसाय घरों की
अपने बच्चों से भी बिछोह कर के,
जी लेती है स्त्रियां एक समय बाद
जो पहले गर्भ में फ़िर छाती से
लगाए हीं घूमती जाती थी
एक वक्त के बाद ना उम्मीद सी
बस पकाती हैं रोटियां
स्त्रियां बुढ़ापे तक ख़ीर पकाएं
तो समझना की खाद डाली जा रहीं है
उसके सपनों को ज़िंदा रखने में
किसी ने मेहनत की हैं
किसी ने उसके प्रेम को अपने प्रेम से
सिंचना छोड़ा नहीं है.

Saturday, 15 October 2022

मौन की गूंज

कुछ नहीं बचेगा गर 
मौन रह जाएगा चारों ओर अकेला मौन
ख़ामोशी और गूंज एक साथ अजीब सिहरन पैदा करेगी
जमा देगी ईश्वर का ख़ून मंदिरों में,
पशु पक्षी गूंजेंगे 
फिर भी सन्नाटा होगा 
नहीं होगी इंसानों की प्रजाति
जो शोर करती हैं और सूना पन भी देती है
कितनी अजीब बात है~
विरानिया जिनके लिए हो
रौनक उन्हीं से हुआ करती है ना?

मर्द जाती

मर्द जाती
कोल्हू के बैल 
जो पिस्ते है सरसों,
जोते है खेत
बोझा लाद कर 
आदम के वंशज का
ढोते है पीठ पर स्त्रियों के सौख
बदले में लालच 
प्रेम पा लेने की
स्वीकृति पा लेने की
ईज़्ज़त पा लेने की
मगर होते है बैल
स्त्री ना चाहें तो
बैल कभी नहीं बनेगा
बाप-भाई, प्रेमी-पति
जिज्ञासू बैल आदमी
नहीं समझता जीवन राग
नहीं समझता पहेलियां
नहीं बनना चाहता भगवान
बस निभाता है तो कुछ जिम्मेदारी
बन कर रहना चाहता है ता-उम्र बैल
और उसे आदमी बनाती स्त्रियां
प्रेम से सींचती जाती.
आलिंगन देती है स्त्रियां
संवारती है उसको
और वो बना रहता है कठोर बैल

Saturday, 13 April 2019

Ram- ramayana

भीतर के 'प्रकाश' स्वयं के
धैर्य के दो हीं नाम
राम सिया के मध्य में
निहित जीवन ज्ञान
तप,त्याग,वचन,धैर्य,लोकलाज
रिश्तों में भी मर्यादा थी
युग  तो था अनेक रानियों का
पर एक विवाह का सिया वादा थी
पी संग वन जाने को आतुर थी
प्रभु जान रहे सब करें थे
चिंता थी कि चौदह बरस की
पर राज भोग ना जीवन कारण थी
मान रखन को साधु का
लक्ष्मी ने रेखा लांघ दिया
रावण का लिखा विनाश जो था
कारण स्वयं नारायणी ने दिया
फ़िर रचा भीषण संग्राम
जब मिल गए राम हनुमान
विजय पताका था लहराया
तब पानी पर सेतु बनाया
सिया की ली गई अग्नि परीक्षा
सिया ने ना कोई प्रश्न उठाया
प्रेम की लीला थीं कि वह
सिय को अयोध्या ले जाते
धर्म था ये की जा कर के
वो पावन है सबको बतलाते
पर होना था युग का अंत
उस वक़्त भी मैला मन था कुछ का
एक धोबी कि मलीन दृष्टि थी
माता पर संदेह किया
फ़िर राजा को था फ़र्ज़ निभाना
पड़ा सिया को वन में जाना
लभ कुश जन्माई माई ने वन में
दिखा दिया अबला नहीं माई
अपनी लड़ाई स्वयं लड़ी
लव कुश को दिया संस्कार
बेटे ने फ़िर जग में घूम कर
निंदा किया सबका हीं अपार
धर्म सिखाया युद्ध सिखाया
मां ने सिखाई मर्यादा
त्याग की मूरत नहीं झुकी फ़िर
अयोध्या को फ़िर ना अपनाया
अंत हुआ दुराचारी का अंत हुआ वह काल
धरती से जन्मी धरती में मिली
और मिल गए फ़िर सीता राम

                प्रज्ञा ठाकुर©     

I do understand!!

I look at him in pain, And lightly smile again. He might think I jest, His sorrows, wounds, unrest. I've fought battles on my own, Survi...