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हालात- ए - इश्क़ ©

हालात- ए - इश्क़ एक कसक है जो ठंडी नहीं होती कुछ उमस है जो भीनी- भीनी सुलगती बज़्म में लोग भी शामिल है ऐसे , किनारे मिलते नहीं नदी के ,जिन्हें आदत है कहने की , झोंका है हवा का वक़्त- ए -काफ़िर दगाबाज़ दरियाँ जो डूबकर उभरने नहीं देती अमावस जैसी रात बीच -बीच में , हर पहर आती है इश्क़ उस बेवा से हालात है जो ख़ुद मर कर भी सवरने नहीं देती शायरी कविता गीत ग़ज़ल , सब मेरे किस्से ही तो हैं लोगों से दाद जो मिलती है मुझे , मेरी आह उसे मुझ तक पहुँचने नहीं देती!! ©प्रज्ञा ठाकुर

मैं स्याह रातें ,तुम गगन के चाँद मेरे ,©

अनगिनत बार यूँ ही लौटी ख़ाली हाथ देख बस गगन की ओर , तुम बहुत दूर थे और चमक रहे थे , मैं अमावस की रात तुमको ग्रहण से दूर रखके लौट आयी इस कदर वापस उस जगह से , जहाँ बस ख़ाब में जाती हूँ,  मिलने तुमसे अक्सर ! ज़िंदगी है यूँ तो मेरी स्याह रातें और तुम हो ,निल-गगन के चाँद मेरे कई बार कोशिश भी की तुम तक पहुंच पाने की पर मेरी किस्मत में,  तुम शामिल नहीं हो हार जाती हूँ मैं अक्सर सोचकर ये , दूर हो तुम दूर ! बहुत ही दूर हमसे , और ये दुरी धरा से , गगन तलक की ही नहीं , ये दुरी है इस दिल से , उस दिल के दरमियाँ भी , ज़िंदगी है यूँ तो मेरी ,स्याह रातें और तुम हो ,निल -गगन के चाँद मेरे ! ©प्रज्ञा ठाकुर

माल लग रही

अल्का बहुत ख़ूबसूरत है ,और उसे इस बात का कोई घमंड नहीं , क्यूंकि ख़ूबसूरत है तो, लोग बचपन से ही उसको कहते है ' तुझे बहुत अच्छा लड़का मिलेगा' , जल्दी शादी करले , तेरा पति कितना लकी होगा , अरे यार तुझे तो कोई टेंशन नहीं लाइफ में तू इतनी सूंदर है ! तुझे तो दहेज़ भी नहीं देना पड़ेगा , तुझे तो कोई भी मिल जायेगा, कोई लड़का मिला की नहीं ? तेरा तो १००% बॉय फ्रेंड होगा तू इतनी सूंदर जो है , बाहर तो बाहर घर में भी , इसके लिए कोई अच्छा लड़का देख के जल्दी शादी कर दो  , अब ऐसी खूबसूरती पर बेचारी इतराये भी कैसे ? जिसके लिए उसको गिफ्ट शादी और लड़के ही मिलते है ! और बाकि चीज़ो के कोई मायने नहीं रहते ! तू सूंदर है तो तुझे अच्छा लड़का मिलेगा , जैसे शादी के लिए ऊपर से सर्टिफिकेट लायी हो, आज तो हद हो गयी , एक नयी जगह गयी दोस्तों के साथ घूमने , और पहली बार सलवार -सूट पहना , ३लङकी और २ लड़के के ग्रुप में , एक लड़का अचानक बोल पड़ा 'माल लग रही ,क्या बात है ? पहले तो वो कुछ समझ नई पायी क्या बोलू इतने घटिया तारीफ के लिए जो गाली की तरह जा के कान से टकरा गए ! तभी दूसरा बोल पड़ा , हॉट लग रही एकदम ! हलकी सी मुस्कराह...

9o's lovers bad times

Summer of late 90's , i was too young to understand love but .. One day i saw some one too down to earth came to the house , he was in love with my elder sister & that was the bad era , when all love story goes like wind after so many people do not have guts to tell or confess parents , there are many who can tell but answer will be a big no ,& those bad times of love when i saw a sweet guy came to my parents , holding mom's hand & asking can you give me permission to take care of your daughter for life time , Imagine how beautiful situation , i would not mind to allow my son or daughter doing that ,But in late 90's it was a ugly night mare , never happens kind of story .. My elder sister's love was imagination , that boy came like a friend , & he went .. as a memory ,i cried because love was in every eyes at those times , all around people having affairs but there was not a single love story i seen to be a real one , That was the time,wh...

लहरों से मोहब्बत!©

मैं समुन्दर का एक किनारा हूँ और मुझे दूसरे किनारे से मोहब्बत है जानती हूँ, हम दो किनारे है कभी मिले नहीं , न कभी मिल भी पाएंगे पर मुझे तुझसे जुदा होने का गम है ये कैसा साथ है? लोग सोचते होंगे मैं दीवानी हूँ जानती हूँ, लोग पागल भी समझते होंगे ! लेकिन मुझे उस रोज़ तुमसे मोहब्बत हुई , 'ए किनारे' जिस दिन तुम्हे छू कर आयी एक लहर ने मुझे छुआ मैं हैरान सी थी कुछ ऐसा उस रोज़ महसूस हुआ कुछ अपना सा, प्यारा सा ,अजब सा, गजब सा , फिर मेरे अंदर के जस्बातों का एक लहर तुझतक पंहुचा और तुझे भी झंकझोर गया 'भीतर तक' ऐसे ही लहरों से हमारा प्रेम आगे बढ़ा हर कहानी तेरी-मेरी हर आपबीती हम दोनो को पता है ! और हमारी चिठियाँ ले जाती ये लहरें , इनसे भी तो कुछ न छिपा है ! मुझे तेरे पास नहीं आना , मुझे तुझसे दूर नहीं जाना , बस मुझे इतनी सी मोहब्बत है तो इसी से , जो ये ख़ूबसूरत सा सिलसिला है मैं ये चाहूंगी की ये खत्म न होने पाए ये कुछ जो मीठा दर्द है खोने न पाए और कभी ये लहरें हमारा पैगाम लाना-लेजाना अगर जो भूले अये किनारे तुझे कसम है की तू और मैं इसी समंदर में ऐसे घु...

मन वाबला !©

मन बावला उड़ता फिरे कभी दिल जिधर ,कभी दर -बदर कभी किसी पुराने मोड़ पर कभी इस शहर, कभी उस शहर जाने कैसा है ये हमसफ़र कभी किसी पुरानी याद में खोया-खोया सा रहे , कभी किसी पुरानी बात में उलझा उलझा सा फिरे कभी आने वाले पल की फ़िक्र में , मायूस सा ज़िंदगी की पहेलियों में जकड़ा हुआ भटका सा एक मैं मुसाफिर हूँ - एक है मुसाफिर मन मेरा ! मन वाबला , मन बावला!!! ©प्रज्ञा ठाकुर

दीवाने बाबू की दीवानी नीलू !©

हर रोज़ की तरह आज भी साम्नाये दिन था , बस एक फर्क था मेरा आज एग्जाम था कॉलेज में , रोज़ की तरह अपने पड़ोसी मेहता अंकल का लड़का मुझे बाइक से ड्राप कर देता था , कॉलेज में वो मेरा सीनियर था , हाँ २ साल से साथ जा रहे है ,सो थोड़ी सी दोस्ती आगे बढ़ी है , कभी-कभी इशारो में एक दूसरे से गुफ्तगू हो जाती है , या कभी एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है , रास्ते में बाइक पर तो कॉलेज सम्बन्धी दुनिया भर की बातें होती है , ,खूब ठहाके लगते है कभी- कभी किसी उटपटांग सी दूसरों की बातों पर . चुप -चाप कॉलेज परिसर में दाखिल होते ही, दो अजनबियों की तरह अपने- अपने क्लास में चले जाते है ,ताकि लोग तरह-तरह की बातें न फैलाये , और हमारी जिंदगी में ताका झांकी न करें, बस इतना ही गहरा और समझदार रिश्ता है हम दोनों का , कभी- कभी लौटते वक़्त रास्ते में रुक के मंदिर चले जाते है या आइस-क्रीम खा लेते है , आइस-क्रीम वाला काका , हमे अफसर बिटिया ,और इनको दीवाने अफसर बाबू कहते है , क्यों ? क्यूंकि हम जो भी बातें करते है वह खड़े होकर चुप -चाप सुनता है , इसने कुछ दिन पहले की हमारी बातें सुन ली थी - अलोक(दीवाने बाबू )- मै...